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तुम और मैं, फिर से

249.00
पुस्तक परिचय ऋतिकेश कुमार गुप्ता का यह पहला साहित्यिक प्रयास है। "तुम और मैं, फिर से" सिर्फ़ एक लव स्टोरी नहीं है, यह रिश्तों, संघर्ष और सपनों की जर्नी है। यह कहानी है ऋषव और परी की, जो पहली नज़र में मिले और फिर जिंदगी की राहों में बिछड़कर भी एक-दूसरे के लिए बने रहे। कभी मोहब्बत, कभी गलतफहमियाँ, कभी दूरी और कभी सपनों की जंग-इस सफ़र में हर वो एहसास है जो दिल को छू जाए। IAS की तैयारी, बिज़नेस बनाने का संघर्ष, परिवार का साथ और भरोसे की अहमियत -इस किताब में जिंदगी के वो सारे रंग हैं, जिन्हें हर इंसान कहीं न कहीं महसूस करता है। दूरी चाहे जितनी भी हो, एहसास पास रहते हैं, यादों के सिलसिले दिल में खास रहते हैं। मिलना और बिछड़ना तो किस्मत की बातें हैं, मगर सच्चे रिश्ते हर हाल में जिंदा रहते हैं
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तुम और मैं, फिर से

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पुस्तक परिचय ऋतिकेश कुमार गुप्ता का यह पहला साहित्यिक प्रयास है। "तुम और मैं, फिर से" सिर्फ़ एक लव स्टोरी नहीं है, यह रिश्तों, संघर्ष और सपनों की जर्नी है। यह कहानी है ऋषव और परी की, जो पहली नज़र में मिले और फिर जिंदगी की राहों में बिछड़कर भी एक-दूसरे के लिए बने रहे। कभी मोहब्बत, कभी गलतफहमियाँ, कभी दूरी और कभी सपनों की जंग-इस सफ़र में हर वो एहसास है जो दिल को छू जाए। IAS की तैयारी, बिज़नेस बनाने का संघर्ष, परिवार का साथ और भरोसे की अहमियत -इस किताब में जिंदगी के वो सारे रंग हैं, जिन्हें हर इंसान कहीं न कहीं महसूस करता है। दूरी चाहे जितनी भी हो, एहसास पास रहते हैं, यादों के सिलसिले दिल में खास रहते हैं। मिलना और बिछड़ना तो किस्मत की बातें हैं, मगर सच्चे रिश्ते हर हाल में जिंदा रहते हैं
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तुम कैसे लड़के हो

299.00
तुम कैसे लड़के हो' पुस्तक के लेखक शिवम् यादव ने यह पुस्तक किसी प्रेम कथा के रूप में नहीं, बल्कि उन नए और बेचैन युवाओं से संवाद के उद्देश्य से लिखी है, जो विवेक का मार्ग छोड़कर ऐसे रास्तों पर भटक रहे हैं जो न उनके लिए हितकर हैं और न समाज के लिए। वैसे तो शिवम् यादव ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान में स्नातक किया है तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से परास्नातक की अपूर्ण पढ़ाई की है, लेकिन उनके जीवन और लेखन के अधिक निकट हमेशा खुली सड़कें, टूटे हुए और बेचैन लोग रहे हैं। यही अनुभव उनकी संवेदनशीलता और वैचारिक गंभीरता का आधार हैं। लेखक श्री प्रेमचंद यादव गुरुजी तथा श्री हरिकेश यादव गुरूजी के प्रति कृतज्ञ हैं, क्योंकि दोनों ने समय-समय पर उनका हौसला बढ़ाया और लेखन के प्रति उन्हें निरंतर प्रेरित किया। इसके साथ ही लेखक उन लोगों के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जिनके प्रति उनकी समर्पित सेवा के बावजूद उन्होंने वैमनस्य छोड़ना उचित नहीं समझा और माहौल को टॉक्सिक बनाए रखना ज्यादा श्रेष्ठ समझा।
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तुम कैसे लड़के हो

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तुम कैसे लड़के हो' पुस्तक के लेखक शिवम् यादव ने यह पुस्तक किसी प्रेम कथा के रूप में नहीं, बल्कि उन नए और बेचैन युवाओं से संवाद के उद्देश्य से लिखी है, जो विवेक का मार्ग छोड़कर ऐसे रास्तों पर भटक रहे हैं जो न उनके लिए हितकर हैं और न समाज के लिए। वैसे तो शिवम् यादव ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान में स्नातक किया है तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से परास्नातक की अपूर्ण पढ़ाई की है, लेकिन उनके जीवन और लेखन के अधिक निकट हमेशा खुली सड़कें, टूटे हुए और बेचैन लोग रहे हैं। यही अनुभव उनकी संवेदनशीलता और वैचारिक गंभीरता का आधार हैं। लेखक श्री प्रेमचंद यादव गुरुजी तथा श्री हरिकेश यादव गुरूजी के प्रति कृतज्ञ हैं, क्योंकि दोनों ने समय-समय पर उनका हौसला बढ़ाया और लेखन के प्रति उन्हें निरंतर प्रेरित किया। इसके साथ ही लेखक उन लोगों के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जिनके प्रति उनकी समर्पित सेवा के बावजूद उन्होंने वैमनस्य छोड़ना उचित नहीं समझा और माहौल को टॉक्सिक बनाए रखना ज्यादा श्रेष्ठ समझा।
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बियॉन्ड मैटर

799.00
बियॉन्ड मैटर केवल शब्दों का संग्रह नहीं, यह एक आंतरिक यात्रा का द्वार है। यह हमें उस अदृश्य धागे की ओर ले जाती है जो मन और पदार्थ को एक ही इकाई में पिरोता है। यहाँ विचार केवल मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली लहरें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी वास्तविकता को आकार देने वाले बीज हैं। यह पुस्तक दिखाती है कि हमारी चेतना, हमारी भावनाएँ और हमारे इरादे किस तरह बाहरी दुनिया की संरचना में गूँज पैदा करते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी की खोजों से लेकर गहरे दार्शनिक प्रश्नों तक, यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि हम केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं हैं, बल्कि उन परिस्थितियों को रचने वाले भी हैं। बियॉन्ड मैटर पाठक को यह अनुभव कराती है कि ध्यान, आत्म जागरूकता और सचेत इरादे के माध्यम से मस्तिष्क को फिर से गढ़ा जा सकता है। यह परिवर्तन केवल मानसिक नहीं, बल्कि अस्तित्व के हर स्तर पर गहराई तक प्रभाव डालता है - शरीर, स्वास्थ्य, संबंध और जीवन की दिशा तक। यह कोई साधारण मार्गदर्शक नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है अपने भीतर उतरने का, उस निस्तब्ध स्रोत को छूने का जहाँ विचार और पदार्थ की सीमाएँ मिट जाती हैं। यह किताब हमें याद दिलाती है कि हमारी वास्तविक शक्ति बाहर नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई है और जब हम उसे जगाते हैं, तब दुनिया भी हमारे साथ बदल जाती है।
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बियॉन्ड मैटर केवल शब्दों का संग्रह नहीं, यह एक आंतरिक यात्रा का द्वार है। यह हमें उस अदृश्य धागे की ओर ले जाती है जो मन और पदार्थ को एक ही इकाई में पिरोता है। यहाँ विचार केवल मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली लहरें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी वास्तविकता को आकार देने वाले बीज हैं। यह पुस्तक दिखाती है कि हमारी चेतना, हमारी भावनाएँ और हमारे इरादे किस तरह बाहरी दुनिया की संरचना में गूँज पैदा करते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी की खोजों से लेकर गहरे दार्शनिक प्रश्नों तक, यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि हम केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं हैं, बल्कि उन परिस्थितियों को रचने वाले भी हैं। बियॉन्ड मैटर पाठक को यह अनुभव कराती है कि ध्यान, आत्म जागरूकता और सचेत इरादे के माध्यम से मस्तिष्क को फिर से गढ़ा जा सकता है। यह परिवर्तन केवल मानसिक नहीं, बल्कि अस्तित्व के हर स्तर पर गहराई तक प्रभाव डालता है - शरीर, स्वास्थ्य, संबंध और जीवन की दिशा तक। यह कोई साधारण मार्गदर्शक नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है अपने भीतर उतरने का, उस निस्तब्ध स्रोत को छूने का जहाँ विचार और पदार्थ की सीमाएँ मिट जाती हैं। यह किताब हमें याद दिलाती है कि हमारी वास्तविक शक्ति बाहर नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई है और जब हम उसे जगाते हैं, तब दुनिया भी हमारे साथ बदल जाती है।
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मेमोरी मैजिक

349.00
मेमोरी मनोज एक प्रसिद्ध मेमोरी ट्रेनर, प्रेरक वक्ता और शिक्षाविद् हैं। वे मानव मस्तिष्क की असीम क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने हजारों छात्रों, पेशेवरों और संस्थानों को अपनी याददाश्त बढ़ाने, तेज़ी से सीखने और मानसिक रूप से फिट रहने की व्यावहारिक विधियाँ सिखाई हैं। उनकी अनोखी तकनीकें सरल, रोचक और प्रयोग करने योग्य हैं, जिनसे लोगों के जीवन में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन आया है। मेमोरी मनोज का दृढ़ विश्वास है कि – "तेज़ दिमाग़ ही तेज़ भविष्य की कुंजी है।" इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए वे निरंतर लोगों को यह सिखाते हैं कि कैसे याददाश्त को मजबूत बनाकर शिक्षा, करियर और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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मेमोरी मैजिक

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मेमोरी मनोज एक प्रसिद्ध मेमोरी ट्रेनर, प्रेरक वक्ता और शिक्षाविद् हैं। वे मानव मस्तिष्क की असीम क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने हजारों छात्रों, पेशेवरों और संस्थानों को अपनी याददाश्त बढ़ाने, तेज़ी से सीखने और मानसिक रूप से फिट रहने की व्यावहारिक विधियाँ सिखाई हैं। उनकी अनोखी तकनीकें सरल, रोचक और प्रयोग करने योग्य हैं, जिनसे लोगों के जीवन में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन आया है। मेमोरी मनोज का दृढ़ विश्वास है कि – "तेज़ दिमाग़ ही तेज़ भविष्य की कुंजी है।" इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए वे निरंतर लोगों को यह सिखाते हैं कि कैसे याददाश्त को मजबूत बनाकर शिक्षा, करियर और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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लब्ज़ के दो शब्द

349.00
यह कविताओं का एक संग्रह है जो प्रेम, भावनाओं और जीवन के अनकहे पलों को शब्दों में पिरोता है। यह दो शब्दों के माध्यम से एक पूरी दुनिया को छूने का प्रयास है।
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लब्ज़ के दो शब्द

349.00
यह कविताओं का एक संग्रह है जो प्रेम, भावनाओं और जीवन के अनकहे पलों को शब्दों में पिरोता है। यह दो शब्दों के माध्यम से एक पूरी दुनिया को छूने का प्रयास है।
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शब्दों की अनकही दुनिया

349.00
यह किताब उन शब्दों की दुनिया है, जो होंठों तक आते-आते खार्मोश हो गए। यहाँ भावनाएँ शोर नहीं करतीं, बस चुपचाप दिल में उतर जाती हैं। हर कविता एक एहसास है-कभी बचपन, कभी परिवार, कभी समाज । "शब्दों की अनकही दुनिया" उन जज़्बातों की आवाज़ है, जो कहे नहीं गए।
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शब्दों की अनकही दुनिया

349.00
यह किताब उन शब्दों की दुनिया है, जो होंठों तक आते-आते खार्मोश हो गए। यहाँ भावनाएँ शोर नहीं करतीं, बस चुपचाप दिल में उतर जाती हैं। हर कविता एक एहसास है-कभी बचपन, कभी परिवार, कभी समाज । "शब्दों की अनकही दुनिया" उन जज़्बातों की आवाज़ है, जो कहे नहीं गए।
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