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Zenesta February Edition

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अधूरी पूरी बातें मेरी अनकही

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“अधूरी, पूरी बातें” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है जो अक्सर दिल में ही रह जाते हैं—कभी अधूरे, तो कभी पूरे होकर भी अनसुने।“अधूरी, पूरी बातें” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है जो अक्सर दिल में ही रह जाते हैं—कभी अधूरे, तो कभी पूरे होकर भी अनसुने। इस संग्रह की कविताएँ जीवन के छोटे-बड़े अनुभवों, रिश्तों की गहराई और गर्माहट, स्त्री के भीतर चल रहे अनकहे संघर्ष और उसकी शक्ति, प्रकृति की सुकून भरी छाँव, देशप्रेम की भावना और आत्मा के शांत संवाद को सहज और संवेदनशील शब्दों में पिरोती हैं। इनमें कहीं अपनापन है, कहीं हल्की सी टीस, तो कहीं खुद को समझने और स्वीकार करने की एक सच्ची कोशिश। हर कविता एक आईना है—कभी आपके दिल का, कभी मेरे एहसासों का… और कहीं हम सबकी अधूरी और पूरी कहानियों का। यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए है—क्योंकि जो बातें अधूरी रह जाती हैं, वही अक्सर हमें भीतर से पूरा कर जाती हैं।    
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अधूरी पूरी बातें मेरी अनकही

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“अधूरी, पूरी बातें” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है जो अक्सर दिल में ही रह जाते हैं—कभी अधूरे, तो कभी पूरे होकर भी अनसुने।“अधूरी, पूरी बातें” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है जो अक्सर दिल में ही रह जाते हैं—कभी अधूरे, तो कभी पूरे होकर भी अनसुने। इस संग्रह की कविताएँ जीवन के छोटे-बड़े अनुभवों, रिश्तों की गहराई और गर्माहट, स्त्री के भीतर चल रहे अनकहे संघर्ष और उसकी शक्ति, प्रकृति की सुकून भरी छाँव, देशप्रेम की भावना और आत्मा के शांत संवाद को सहज और संवेदनशील शब्दों में पिरोती हैं। इनमें कहीं अपनापन है, कहीं हल्की सी टीस, तो कहीं खुद को समझने और स्वीकार करने की एक सच्ची कोशिश। हर कविता एक आईना है—कभी आपके दिल का, कभी मेरे एहसासों का… और कहीं हम सबकी अधूरी और पूरी कहानियों का। यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए है—क्योंकि जो बातें अधूरी रह जाती हैं, वही अक्सर हमें भीतर से पूरा कर जाती हैं।    
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अनोखा बंधन

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अस्वी

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आख़िर! फिर हम बिछड़ गए….

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कभी-कभी वो एक ऐसी बेचैनी से शुरू होता है जो रूह तक को चुभ जाए। ये किताब उसी प्यार की दास्तान है— जो जितना गहरा था, उतना ही दर्दनाक निकला। जहाँ मोहब्बत ने दूरियाँ पैदा कीं,और दूरियों ने दिल में ऐसे सवाल छोड़े जिनके जवाब आज तक नहीं मिले।रिश्ता धीरे-धीरे टूटता नहीं… बल्कि रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरता है। और जब इश्क़ बोझ बन जाए,तो सबसे खतरनाक वक़्त वही होता है— फिर एक पल आता है जब “तुम हो” से ज़्यादा“तुम अब नहीं” महसूस होने लगता है। इसी खामोशी में मोहब्बत अपनी आखिरी सांस लेती है— और दर्द, बददुआओं की शक्ल में दिल की दीवारों पर काले निशान छोड़ जाता है। लेकिन हर अंत अंधेरा नहीं होता…कुछ अंधेरे ही इंसान को खुद से मिलाते हैं। “आख़िर! फिर हम बिछड़ गए....” एक ऐसे इश्क़ की कहानी है जो टूटकर बिखरा,दर्द बनकर जिया,और फिर ख़ामोशी में अपना नया जन्म पाया।
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आख़िर! फिर हम बिछड़ गए….

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कभी-कभी वो एक ऐसी बेचैनी से शुरू होता है जो रूह तक को चुभ जाए। ये किताब उसी प्यार की दास्तान है— जो जितना गहरा था, उतना ही दर्दनाक निकला। जहाँ मोहब्बत ने दूरियाँ पैदा कीं,और दूरियों ने दिल में ऐसे सवाल छोड़े जिनके जवाब आज तक नहीं मिले।रिश्ता धीरे-धीरे टूटता नहीं… बल्कि रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरता है। और जब इश्क़ बोझ बन जाए,तो सबसे खतरनाक वक़्त वही होता है— फिर एक पल आता है जब “तुम हो” से ज़्यादा“तुम अब नहीं” महसूस होने लगता है। इसी खामोशी में मोहब्बत अपनी आखिरी सांस लेती है— और दर्द, बददुआओं की शक्ल में दिल की दीवारों पर काले निशान छोड़ जाता है। लेकिन हर अंत अंधेरा नहीं होता…कुछ अंधेरे ही इंसान को खुद से मिलाते हैं। “आख़िर! फिर हम बिछड़ गए....” एक ऐसे इश्क़ की कहानी है जो टूटकर बिखरा,दर्द बनकर जिया,और फिर ख़ामोशी में अपना नया जन्म पाया।
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