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जहाँ सुदामा वहाँ कृष्ण

299.00
साहित्य के क्षेत्र में गीता भाटिया जी का नाम नया नहीं है। साहित्य में इनका योगदान सराहनीय है। गीता जी को बचपन से लिखने का शौक था जो अनुभव के साथ-साथ और निखरता गया। गीता जी एक अनुभवी कवयित्री ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन उपन्यासकार एवं कहानीकार भी हैं। इन्होंने लगभग सभी विषयों को अपनी लेखनी में संजोया है। इनके लेखन काल्पनिक, ऐतिहासिक तथा सत्य घटनाओं से परिपूर्ण हैं। गीता जी की लिखी हर कहानी मानों दिल में उतरकर एक छाप छोड़ जाती हैं। इनकी कविताएँ एवं कहानियाँ जीवन के हर पहलू को दर्शाती हैं। गीता भाटिया जी की अब तक तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य जगत में यह उनकी चौहदवीं पुस्तक है। हम आशा करते हैं भविष्य में भी साहित्य जगत में उनका योगदान हमें लाभान्वित करता रहेगा। उनकी सब पुस्तकें एमेजोन और फ्लिपकार्ट उपलब्ध हैं। पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर उन सब पुस्तकों विवरण उपलब्ध हैं। गीता भाटिया 53/41 वैस्ट पंजाबी बाग नई दिल्ली-110026 मोबाइल-9868858792 ई-मेल-geeta13sudesh8@gmail.com
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जहाँ सुदामा वहाँ कृष्ण

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साहित्य के क्षेत्र में गीता भाटिया जी का नाम नया नहीं है। साहित्य में इनका योगदान सराहनीय है। गीता जी को बचपन से लिखने का शौक था जो अनुभव के साथ-साथ और निखरता गया। गीता जी एक अनुभवी कवयित्री ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन उपन्यासकार एवं कहानीकार भी हैं। इन्होंने लगभग सभी विषयों को अपनी लेखनी में संजोया है। इनके लेखन काल्पनिक, ऐतिहासिक तथा सत्य घटनाओं से परिपूर्ण हैं। गीता जी की लिखी हर कहानी मानों दिल में उतरकर एक छाप छोड़ जाती हैं। इनकी कविताएँ एवं कहानियाँ जीवन के हर पहलू को दर्शाती हैं। गीता भाटिया जी की अब तक तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य जगत में यह उनकी चौहदवीं पुस्तक है। हम आशा करते हैं भविष्य में भी साहित्य जगत में उनका योगदान हमें लाभान्वित करता रहेगा। उनकी सब पुस्तकें एमेजोन और फ्लिपकार्ट उपलब्ध हैं। पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर उन सब पुस्तकों विवरण उपलब्ध हैं। गीता भाटिया 53/41 वैस्ट पंजाबी बाग नई दिल्ली-110026 मोबाइल-9868858792 ई-मेल-geeta13sudesh8@gmail.com
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तुम और मैं, फिर से

249.00
पुस्तक परिचय ऋतिकेश कुमार गुप्ता का यह पहला साहित्यिक प्रयास है। "तुम और मैं, फिर से" सिर्फ़ एक लव स्टोरी नहीं है, यह रिश्तों, संघर्ष और सपनों की जर्नी है। यह कहानी है ऋषव और परी की, जो पहली नज़र में मिले और फिर जिंदगी की राहों में बिछड़कर भी एक-दूसरे के लिए बने रहे। कभी मोहब्बत, कभी गलतफहमियाँ, कभी दूरी और कभी सपनों की जंग-इस सफ़र में हर वो एहसास है जो दिल को छू जाए। IAS की तैयारी, बिज़नेस बनाने का संघर्ष, परिवार का साथ और भरोसे की अहमियत -इस किताब में जिंदगी के वो सारे रंग हैं, जिन्हें हर इंसान कहीं न कहीं महसूस करता है। दूरी चाहे जितनी भी हो, एहसास पास रहते हैं, यादों के सिलसिले दिल में खास रहते हैं। मिलना और बिछड़ना तो किस्मत की बातें हैं, मगर सच्चे रिश्ते हर हाल में जिंदा रहते हैं
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तुम और मैं, फिर से

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पुस्तक परिचय ऋतिकेश कुमार गुप्ता का यह पहला साहित्यिक प्रयास है। "तुम और मैं, फिर से" सिर्फ़ एक लव स्टोरी नहीं है, यह रिश्तों, संघर्ष और सपनों की जर्नी है। यह कहानी है ऋषव और परी की, जो पहली नज़र में मिले और फिर जिंदगी की राहों में बिछड़कर भी एक-दूसरे के लिए बने रहे। कभी मोहब्बत, कभी गलतफहमियाँ, कभी दूरी और कभी सपनों की जंग-इस सफ़र में हर वो एहसास है जो दिल को छू जाए। IAS की तैयारी, बिज़नेस बनाने का संघर्ष, परिवार का साथ और भरोसे की अहमियत -इस किताब में जिंदगी के वो सारे रंग हैं, जिन्हें हर इंसान कहीं न कहीं महसूस करता है। दूरी चाहे जितनी भी हो, एहसास पास रहते हैं, यादों के सिलसिले दिल में खास रहते हैं। मिलना और बिछड़ना तो किस्मत की बातें हैं, मगर सच्चे रिश्ते हर हाल में जिंदा रहते हैं
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तुम कैसे लड़के हो

299.00
तुम कैसे लड़के हो' पुस्तक के लेखक शिवम् यादव ने यह पुस्तक किसी प्रेम कथा के रूप में नहीं, बल्कि उन नए और बेचैन युवाओं से संवाद के उद्देश्य से लिखी है, जो विवेक का मार्ग छोड़कर ऐसे रास्तों पर भटक रहे हैं जो न उनके लिए हितकर हैं और न समाज के लिए। वैसे तो शिवम् यादव ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान में स्नातक किया है तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से परास्नातक की अपूर्ण पढ़ाई की है, लेकिन उनके जीवन और लेखन के अधिक निकट हमेशा खुली सड़कें, टूटे हुए और बेचैन लोग रहे हैं। यही अनुभव उनकी संवेदनशीलता और वैचारिक गंभीरता का आधार हैं। लेखक श्री प्रेमचंद यादव गुरुजी तथा श्री हरिकेश यादव गुरूजी के प्रति कृतज्ञ हैं, क्योंकि दोनों ने समय-समय पर उनका हौसला बढ़ाया और लेखन के प्रति उन्हें निरंतर प्रेरित किया। इसके साथ ही लेखक उन लोगों के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जिनके प्रति उनकी समर्पित सेवा के बावजूद उन्होंने वैमनस्य छोड़ना उचित नहीं समझा और माहौल को टॉक्सिक बनाए रखना ज्यादा श्रेष्ठ समझा।
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तुम कैसे लड़के हो

299.00
तुम कैसे लड़के हो' पुस्तक के लेखक शिवम् यादव ने यह पुस्तक किसी प्रेम कथा के रूप में नहीं, बल्कि उन नए और बेचैन युवाओं से संवाद के उद्देश्य से लिखी है, जो विवेक का मार्ग छोड़कर ऐसे रास्तों पर भटक रहे हैं जो न उनके लिए हितकर हैं और न समाज के लिए। वैसे तो शिवम् यादव ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान में स्नातक किया है तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से परास्नातक की अपूर्ण पढ़ाई की है, लेकिन उनके जीवन और लेखन के अधिक निकट हमेशा खुली सड़कें, टूटे हुए और बेचैन लोग रहे हैं। यही अनुभव उनकी संवेदनशीलता और वैचारिक गंभीरता का आधार हैं। लेखक श्री प्रेमचंद यादव गुरुजी तथा श्री हरिकेश यादव गुरूजी के प्रति कृतज्ञ हैं, क्योंकि दोनों ने समय-समय पर उनका हौसला बढ़ाया और लेखन के प्रति उन्हें निरंतर प्रेरित किया। इसके साथ ही लेखक उन लोगों के प्रति भी कृतज्ञ हैं, जिनके प्रति उनकी समर्पित सेवा के बावजूद उन्होंने वैमनस्य छोड़ना उचित नहीं समझा और माहौल को टॉक्सिक बनाए रखना ज्यादा श्रेष्ठ समझा।
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ध्रुवतारा

349.00
जीवन कैवल परिस्थितियों का नाम नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में स्वयं को पहचान लेने का नाम है। संघर्ष, धैर्य और विश्वास- ये तीनों ही मेरे जीवन और मेरी लेखनी के आधार रहे हैं। यह कावय्-संग्रह मेरे अनुभवों, मेरी संवेदनाओं और मेरे आत्मसंघर्ष की अभिवक्ति है। इन रचनाओं में नारी-चेतना की आवाज है, राष्ट्र-भाव की धड़कन है और आत्मबल का आह्वान भी। मेरे लिए लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि आत्मा की साधना है। ऐसा ही एक विशेष क्षण मेरे जीवन में तब आया, जब नवोदय विदयालय में पीजीटी (हिंदी) के पद हेतु मेरे साक्षात्कार के दौरान इंटरवयू पैनल द्वारा मेरी कविता "पथ है तेरा साथी" की कुछ पंक्तियाँ सुनी गई। उन पंक्तियों की आत्मविश्वासपूर्ण अभिवक्ति और भाव-गहराई से वे इतने प्रभावित हुए कि उस साक्षात्कार का अनुभव मेरे लिए अतयंत सकारात्मक और उत्साहवर्धक बन गया। वह क्षण मेरे जीवन का turning point सिद्ध हुआ। आज मैं प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ, और उसी विश्वास के साथ आप सभी को भी यह संदेश देना चाहती हूँ- यदि शब्दों में सच्चाई हो, विचारों में दृढ़ता हो और मन में विश्वास हो, तो सफलता स्वयं आपके कदम चूमती है। मेरी यह लेखनी मेरे संघर्ष की साथी रही है, और आज उसी लेखनी के माध्यम से मैं प्रतयेक पाठक को साहस, आत्मबल और आशा देने का प्रयास कर रही हूँ। यदि इन कविताओं की कोई पंक्ति आपके जीवन-पथ पर प्रकाश बन सक तो मेरा यह प्रयास सार्थक होगा।
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ध्रुवतारा

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जीवन कैवल परिस्थितियों का नाम नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में स्वयं को पहचान लेने का नाम है। संघर्ष, धैर्य और विश्वास- ये तीनों ही मेरे जीवन और मेरी लेखनी के आधार रहे हैं। यह कावय्-संग्रह मेरे अनुभवों, मेरी संवेदनाओं और मेरे आत्मसंघर्ष की अभिवक्ति है। इन रचनाओं में नारी-चेतना की आवाज है, राष्ट्र-भाव की धड़कन है और आत्मबल का आह्वान भी। मेरे लिए लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि आत्मा की साधना है। ऐसा ही एक विशेष क्षण मेरे जीवन में तब आया, जब नवोदय विदयालय में पीजीटी (हिंदी) के पद हेतु मेरे साक्षात्कार के दौरान इंटरवयू पैनल द्वारा मेरी कविता "पथ है तेरा साथी" की कुछ पंक्तियाँ सुनी गई। उन पंक्तियों की आत्मविश्वासपूर्ण अभिवक्ति और भाव-गहराई से वे इतने प्रभावित हुए कि उस साक्षात्कार का अनुभव मेरे लिए अतयंत सकारात्मक और उत्साहवर्धक बन गया। वह क्षण मेरे जीवन का turning point सिद्ध हुआ। आज मैं प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ, और उसी विश्वास के साथ आप सभी को भी यह संदेश देना चाहती हूँ- यदि शब्दों में सच्चाई हो, विचारों में दृढ़ता हो और मन में विश्वास हो, तो सफलता स्वयं आपके कदम चूमती है। मेरी यह लेखनी मेरे संघर्ष की साथी रही है, और आज उसी लेखनी के माध्यम से मैं प्रतयेक पाठक को साहस, आत्मबल और आशा देने का प्रयास कर रही हूँ। यदि इन कविताओं की कोई पंक्ति आपके जीवन-पथ पर प्रकाश बन सक तो मेरा यह प्रयास सार्थक होगा।
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बियॉन्ड मैटर

799.00
बियॉन्ड मैटर केवल शब्दों का संग्रह नहीं, यह एक आंतरिक यात्रा का द्वार है। यह हमें उस अदृश्य धागे की ओर ले जाती है जो मन और पदार्थ को एक ही इकाई में पिरोता है। यहाँ विचार केवल मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली लहरें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी वास्तविकता को आकार देने वाले बीज हैं। यह पुस्तक दिखाती है कि हमारी चेतना, हमारी भावनाएँ और हमारे इरादे किस तरह बाहरी दुनिया की संरचना में गूँज पैदा करते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी की खोजों से लेकर गहरे दार्शनिक प्रश्नों तक, यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि हम केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं हैं, बल्कि उन परिस्थितियों को रचने वाले भी हैं। बियॉन्ड मैटर पाठक को यह अनुभव कराती है कि ध्यान, आत्म जागरूकता और सचेत इरादे के माध्यम से मस्तिष्क को फिर से गढ़ा जा सकता है। यह परिवर्तन केवल मानसिक नहीं, बल्कि अस्तित्व के हर स्तर पर गहराई तक प्रभाव डालता है - शरीर, स्वास्थ्य, संबंध और जीवन की दिशा तक। यह कोई साधारण मार्गदर्शक नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है अपने भीतर उतरने का, उस निस्तब्ध स्रोत को छूने का जहाँ विचार और पदार्थ की सीमाएँ मिट जाती हैं। यह किताब हमें याद दिलाती है कि हमारी वास्तविक शक्ति बाहर नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई है और जब हम उसे जगाते हैं, तब दुनिया भी हमारे साथ बदल जाती है।
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बियॉन्ड मैटर

799.00
बियॉन्ड मैटर केवल शब्दों का संग्रह नहीं, यह एक आंतरिक यात्रा का द्वार है। यह हमें उस अदृश्य धागे की ओर ले जाती है जो मन और पदार्थ को एक ही इकाई में पिरोता है। यहाँ विचार केवल मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली लहरें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी वास्तविकता को आकार देने वाले बीज हैं। यह पुस्तक दिखाती है कि हमारी चेतना, हमारी भावनाएँ और हमारे इरादे किस तरह बाहरी दुनिया की संरचना में गूँज पैदा करते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी की खोजों से लेकर गहरे दार्शनिक प्रश्नों तक, यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि हम केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं हैं, बल्कि उन परिस्थितियों को रचने वाले भी हैं। बियॉन्ड मैटर पाठक को यह अनुभव कराती है कि ध्यान, आत्म जागरूकता और सचेत इरादे के माध्यम से मस्तिष्क को फिर से गढ़ा जा सकता है। यह परिवर्तन केवल मानसिक नहीं, बल्कि अस्तित्व के हर स्तर पर गहराई तक प्रभाव डालता है - शरीर, स्वास्थ्य, संबंध और जीवन की दिशा तक। यह कोई साधारण मार्गदर्शक नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है अपने भीतर उतरने का, उस निस्तब्ध स्रोत को छूने का जहाँ विचार और पदार्थ की सीमाएँ मिट जाती हैं। यह किताब हमें याद दिलाती है कि हमारी वास्तविक शक्ति बाहर नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई है और जब हम उसे जगाते हैं, तब दुनिया भी हमारे साथ बदल जाती है।
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माण्डवी

451.00
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मृदुल महाभारत

349.00
आम आदमी के जीवन का द्वंद्व, संघर्ष और पल-पल रिसती पीड़ा किसी महाभारत कथा से कम नही है। आम आदमी की उलझन प्रतिदिन महाभारत का एहसास दिलाती है। शायद इसी कारण "मृदुल महाभारत कथा संग्रह" की यह पुस्तक उसी पीड़ा और द्वंद्व को कागज़ पर उतारने का एक विनम्र प्रयास है। मैंने अपनी ओर से पूरी ईमानदारी से इसे व्यक्त करने की कोशिश की है। यह प्रयास कितना सफल हुआ है, इसका निर्णय पाठक ही करेंगे। और मेरी गलतियों पर मुझे डांटकर समझायेंगे भी। कम से कम मुझे इतनी तो उम्मीद है ही। मैं अभी तीस वर्ष से कम का हूँ; गलतियाँ करना स्वाभाविक है, पर उनसे सीखना भी उतना ही आवश्यक है। आशा है कि समय के साथ मैं और बेहतर लिखना सीखूँगा और आपका मार्गदर्शन लाभ भी उठाऊंगा। निवेदन है कि आप लोग मुझ पर कृपा बनाए रखियेगा। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ हैं- सातवाँ वचन, असली श्वान, तकनीकी समस्या, पशु प्रेमी, गृह-द्वंद्व तथा मृदुल महाभारत । पुस्तक का नामकरण अंतिम कहानी के आधार पर ही किया गया है। प्रत्येक कहानी अपने आप में एक अलग दुनिया और अनुभव को प्रस्तुत करती है। इस महत्वपूर्ण सृजन के दौरान मेरा हौसला बढ़ाने के लिए मैं महान शिक्षक श्री प्रेमचंद गुरुजी, श्री अशोक कुमार गुरुजी, श्री विपिन कुमार गुरुजी तथा श्री हरिकेश कुमार गुरुजी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इनके सरल, ज़मीन से जुड़े स्वभाव के कारण यह दुनिया थोड़ी और बेहतर लगती है। अंत में अच्छे मित्र और व्यक्ति के तौर पर मैं श्री आनंद भाई और जैतपुरवासी साधु-स्वभाव श्री संदीप भाई को धन्यवाद करता हूं।
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मृदुल महाभारत

349.00
आम आदमी के जीवन का द्वंद्व, संघर्ष और पल-पल रिसती पीड़ा किसी महाभारत कथा से कम नही है। आम आदमी की उलझन प्रतिदिन महाभारत का एहसास दिलाती है। शायद इसी कारण "मृदुल महाभारत कथा संग्रह" की यह पुस्तक उसी पीड़ा और द्वंद्व को कागज़ पर उतारने का एक विनम्र प्रयास है। मैंने अपनी ओर से पूरी ईमानदारी से इसे व्यक्त करने की कोशिश की है। यह प्रयास कितना सफल हुआ है, इसका निर्णय पाठक ही करेंगे। और मेरी गलतियों पर मुझे डांटकर समझायेंगे भी। कम से कम मुझे इतनी तो उम्मीद है ही। मैं अभी तीस वर्ष से कम का हूँ; गलतियाँ करना स्वाभाविक है, पर उनसे सीखना भी उतना ही आवश्यक है। आशा है कि समय के साथ मैं और बेहतर लिखना सीखूँगा और आपका मार्गदर्शन लाभ भी उठाऊंगा। निवेदन है कि आप लोग मुझ पर कृपा बनाए रखियेगा। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ हैं- सातवाँ वचन, असली श्वान, तकनीकी समस्या, पशु प्रेमी, गृह-द्वंद्व तथा मृदुल महाभारत । पुस्तक का नामकरण अंतिम कहानी के आधार पर ही किया गया है। प्रत्येक कहानी अपने आप में एक अलग दुनिया और अनुभव को प्रस्तुत करती है। इस महत्वपूर्ण सृजन के दौरान मेरा हौसला बढ़ाने के लिए मैं महान शिक्षक श्री प्रेमचंद गुरुजी, श्री अशोक कुमार गुरुजी, श्री विपिन कुमार गुरुजी तथा श्री हरिकेश कुमार गुरुजी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इनके सरल, ज़मीन से जुड़े स्वभाव के कारण यह दुनिया थोड़ी और बेहतर लगती है। अंत में अच्छे मित्र और व्यक्ति के तौर पर मैं श्री आनंद भाई और जैतपुरवासी साधु-स्वभाव श्री संदीप भाई को धन्यवाद करता हूं।
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मेमोरी मैजिक

349.00
मेमोरी मनोज एक प्रसिद्ध मेमोरी ट्रेनर, प्रेरक वक्ता और शिक्षाविद् हैं। वे मानव मस्तिष्क की असीम क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने हजारों छात्रों, पेशेवरों और संस्थानों को अपनी याददाश्त बढ़ाने, तेज़ी से सीखने और मानसिक रूप से फिट रहने की व्यावहारिक विधियाँ सिखाई हैं। उनकी अनोखी तकनीकें सरल, रोचक और प्रयोग करने योग्य हैं, जिनसे लोगों के जीवन में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन आया है। मेमोरी मनोज का दृढ़ विश्वास है कि – "तेज़ दिमाग़ ही तेज़ भविष्य की कुंजी है।" इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए वे निरंतर लोगों को यह सिखाते हैं कि कैसे याददाश्त को मजबूत बनाकर शिक्षा, करियर और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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मेमोरी मैजिक

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मेमोरी मनोज एक प्रसिद्ध मेमोरी ट्रेनर, प्रेरक वक्ता और शिक्षाविद् हैं। वे मानव मस्तिष्क की असीम क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने हजारों छात्रों, पेशेवरों और संस्थानों को अपनी याददाश्त बढ़ाने, तेज़ी से सीखने और मानसिक रूप से फिट रहने की व्यावहारिक विधियाँ सिखाई हैं। उनकी अनोखी तकनीकें सरल, रोचक और प्रयोग करने योग्य हैं, जिनसे लोगों के जीवन में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन आया है। मेमोरी मनोज का दृढ़ विश्वास है कि – "तेज़ दिमाग़ ही तेज़ भविष्य की कुंजी है।" इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए वे निरंतर लोगों को यह सिखाते हैं कि कैसे याददाश्त को मजबूत बनाकर शिक्षा, करियर और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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