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Fine arts and society ” ललित कला एवं समाज “

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ललित कला अर्थात मानव कल्पना द्वारा रचित ऐसी कलात्मक वस्तुएं या दृश्य जिसे देखकर आनंद या रस का बोध होता हो । चित्रकला, मूर्ति कला, छापा कला, सेरेमिक पत्रकला, वस्त्र कला, इंस्टॉलेशन आर्ट, वीडियो आर्ट आदि बहुत चर्चित कला विधा दृश्य कला (विजुअल आर्ट ) की मुख्य शाखा है । आदिकाल से चले आ रहे स्वरूपों में जनजातीय समाज के परंपरागत दृश्य कला रचनाओं में अपना विशेष अस्तित्व दर्शाती हैं वर्तमान समय में अनेक आकर्षक वस्तुएं कलात्मक रूप में ढाली जा रही हैं जिसे कला का आधुनिक व्यवसायीकरण कहा जा सकता है । आधुनिक युग में ललित कला का क्षेत्र बहुत विस्तृत हो गया है । आजकल कला किसी भी रुप या माध्यम में प्रस्तुत की जा सकती है चाहे वह मानव मानव सामाजिक परिवेश की वास्तविकता हो या फिर प्रकृति के गूढ़ रहस्य से जुड़ी हुई मानव मन की संवेदनाएं, परंतु किसी भी व्यक्ति के लिए अपने कलात्मक विचार एवं अनुभव को पूरी तरह से शब्दों में प्रस्तुत करना निश्चित रूप से एक कठिन कार्य है । किंतु इस पुस्तक में गद्य एवं पद्य के माध्यम से जो वैचारिक भावाभिव्यक्ति हुई है वह वास्तव में अत्यंत आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक है ____डॉ. अर्चना द्विवेदी

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