मृदुल महाभारत
₹349.00
ISBN:- 978-93-6976-702-1
Author:- शिवम् यादव
Total Pages:- 107
आम आदमी के जीवन का द्वंद्व, संघर्ष और पल-पल रिसती पीड़ा किसी महाभारत कथा से कम नही है। आम आदमी की उलझन प्रतिदिन महाभारत का एहसास दिलाती है। शायद इसी कारण “मृदुल महाभारत कथा संग्रह” की यह पुस्तक उसी पीड़ा और द्वंद्व को कागज़ पर उतारने का एक विनम्र प्रयास है। मैंने अपनी ओर से पूरी ईमानदारी से इसे व्यक्त करने की कोशिश की है। यह प्रयास कितना सफल हुआ है, इसका निर्णय पाठक ही करेंगे। और मेरी गलतियों पर मुझे डांटकर समझायेंगे भी। कम से कम मुझे इतनी तो उम्मीद है ही।
मैं अभी तीस वर्ष से कम का हूँ; गलतियाँ करना स्वाभाविक है, पर उनसे सीखना भी उतना ही आवश्यक है। आशा है कि समय के साथ मैं और बेहतर लिखना सीखूँगा और आपका मार्गदर्शन लाभ भी उठाऊंगा। निवेदन है कि आप लोग मुझ पर कृपा बनाए रखियेगा।
इस संग्रह में शामिल कहानियाँ हैं- सातवाँ वचन, असली श्वान, तकनीकी समस्या, पशु प्रेमी, गृह-द्वंद्व तथा मृदुल महाभारत । पुस्तक का नामकरण अंतिम कहानी के आधार पर ही किया गया है। प्रत्येक कहानी अपने आप में एक अलग दुनिया और अनुभव को प्रस्तुत करती है।
इस महत्वपूर्ण सृजन के दौरान मेरा हौसला बढ़ाने के लिए मैं महान शिक्षक श्री प्रेमचंद गुरुजी, श्री अशोक कुमार गुरुजी, श्री विपिन कुमार गुरुजी तथा श्री हरिकेश कुमार गुरुजी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इनके सरल, ज़मीन से जुड़े स्वभाव के कारण यह दुनिया थोड़ी और बेहतर लगती है।
अंत में अच्छे मित्र और व्यक्ति के तौर पर मैं श्री आनंद भाई और जैतपुरवासी साधु-स्वभाव श्री संदीप भाई को धन्यवाद करता हूं।


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