जमुई वाली
₹349.00
इस प्रस्तुत पुस्तक का शीर्षक 'जमुई वाली' मेरे दिवंगत पत्नी वन्दना कुमारी के मायके जमुई जो अब जमुई जिला के नाम से बिहार का एक जिला है। जयादा कुछ नहीं, वन्दना कुमारी के पारिवारिक परिवेश पृष्ठभूमि उनके बड़े भाई राजीव कुमार मेरे बड़े साला छोटे गानू, साली बबली कुमारी, नीलकमल उर्फ नीनी, सबसे छोटी साली रोजी, पिता रामाशंकर प्रसाद (अवकाश प्राप्त प्रचार्य एकलवय् कॉलेज जमुई), माता सरोज देवी के आत्मिक प्रेम मेहमान नवाजी जो जमुई के पूरे जिले में महत्व रखता है, इनके ही भाषा में 'आहो मेहमान' दिल को छू जाता है, के नाम से आधार पर तथा पत्नी के सरल स्वभाव प्रेम अविस्मरणीय है, के इस पुस्तक का शीर्षक ही जमुई वाली है, जो काफी रोचक और मजेदार है। मैं अपना परिचय काफी कम शब्दों में देता हूँ। मैं पेशेवर अधिवक्ता हूँ, कार्यक्षेत्र वय्वहार नयायालय बाँका जिला बाँका है तथा रंग-मिजाज से शायर और गजलकार है, एक नाम और मुझे प्रभावित किया, जिसमें कि 'नदिया के पार' का गाना गया, वह भी अधिवक्ता है। सूफी संत नहीं हूँ, फिर भी प्रम का गीत गाता हूँ। उर्दू जुबान मुझे बेहतर आता है। हृदय प्रेम प्रसंग प्रतयेक जीवित वक्ति का आत्मलुभावन है। इस पुस्तक में प्रेम, पयार, इंतजार, वस्ल-जुदाई, संगम, मिलन, विच्छेद ।
जमुई वाली
₹349.00
इस प्रस्तुत पुस्तक का शीर्षक 'जमुई वाली' मेरे दिवंगत पत्नी वन्दना कुमारी के मायके जमुई जो अब जमुई जिला के नाम से बिहार का एक जिला है। जयादा कुछ नहीं, वन्दना कुमारी के पारिवारिक परिवेश पृष्ठभूमि उनके बड़े भाई राजीव कुमार मेरे बड़े साला छोटे गानू, साली बबली कुमारी, नीलकमल उर्फ नीनी, सबसे छोटी साली रोजी, पिता रामाशंकर प्रसाद (अवकाश प्राप्त प्रचार्य एकलवय् कॉलेज जमुई), माता सरोज देवी के आत्मिक प्रेम मेहमान नवाजी जो जमुई के पूरे जिले में महत्व रखता है, इनके ही भाषा में 'आहो मेहमान' दिल को छू जाता है, के नाम से आधार पर तथा पत्नी के सरल स्वभाव प्रेम अविस्मरणीय है, के इस पुस्तक का शीर्षक ही जमुई वाली है, जो काफी रोचक और मजेदार है। मैं अपना परिचय काफी कम शब्दों में देता हूँ। मैं पेशेवर अधिवक्ता हूँ, कार्यक्षेत्र वय्वहार नयायालय बाँका जिला बाँका है तथा रंग-मिजाज से शायर और गजलकार है, एक नाम और मुझे प्रभावित किया, जिसमें कि 'नदिया के पार' का गाना गया, वह भी अधिवक्ता है। सूफी संत नहीं हूँ, फिर भी प्रम का गीत गाता हूँ। उर्दू जुबान मुझे बेहतर आता है। हृदय प्रेम प्रसंग प्रतयेक जीवित वक्ति का आत्मलुभावन है। इस पुस्तक में प्रेम, पयार, इंतजार, वस्ल-जुदाई, संगम, मिलन, विच्छेद ।
जहाँ सुदामा वहाँ कृष्ण
₹299.00
साहित्य के क्षेत्र में गीता भाटिया जी का नाम नया नहीं है। साहित्य में इनका योगदान सराहनीय है। गीता जी को बचपन से लिखने का शौक था जो अनुभव के साथ-साथ और निखरता गया।
गीता जी एक अनुभवी कवयित्री ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन
उपन्यासकार एवं कहानीकार भी हैं। इन्होंने लगभग सभी विषयों को अपनी लेखनी में संजोया है। इनके लेखन काल्पनिक, ऐतिहासिक तथा सत्य घटनाओं से परिपूर्ण हैं। गीता जी की लिखी हर कहानी मानों दिल में उतरकर एक छाप छोड़ जाती हैं। इनकी कविताएँ एवं कहानियाँ जीवन के हर पहलू को दर्शाती हैं। गीता भाटिया जी की अब तक तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य जगत में यह उनकी चौहदवीं पुस्तक है। हम आशा करते हैं भविष्य में भी साहित्य जगत में उनका योगदान हमें लाभान्वित करता रहेगा। उनकी सब पुस्तकें एमेजोन और फ्लिपकार्ट उपलब्ध हैं। पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर उन सब पुस्तकों विवरण उपलब्ध हैं।
गीता भाटिया
53/41 वैस्ट पंजाबी बाग
नई दिल्ली-110026
मोबाइल-9868858792
ई-मेल-geeta13sudesh8@gmail.com
जहाँ सुदामा वहाँ कृष्ण
₹299.00
साहित्य के क्षेत्र में गीता भाटिया जी का नाम नया नहीं है। साहित्य में इनका योगदान सराहनीय है। गीता जी को बचपन से लिखने का शौक था जो अनुभव के साथ-साथ और निखरता गया।
गीता जी एक अनुभवी कवयित्री ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन
उपन्यासकार एवं कहानीकार भी हैं। इन्होंने लगभग सभी विषयों को अपनी लेखनी में संजोया है। इनके लेखन काल्पनिक, ऐतिहासिक तथा सत्य घटनाओं से परिपूर्ण हैं। गीता जी की लिखी हर कहानी मानों दिल में उतरकर एक छाप छोड़ जाती हैं। इनकी कविताएँ एवं कहानियाँ जीवन के हर पहलू को दर्शाती हैं। गीता भाटिया जी की अब तक तेरह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य जगत में यह उनकी चौहदवीं पुस्तक है। हम आशा करते हैं भविष्य में भी साहित्य जगत में उनका योगदान हमें लाभान्वित करता रहेगा। उनकी सब पुस्तकें एमेजोन और फ्लिपकार्ट उपलब्ध हैं। पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर उन सब पुस्तकों विवरण उपलब्ध हैं।
गीता भाटिया
53/41 वैस्ट पंजाबी बाग
नई दिल्ली-110026
मोबाइल-9868858792
ई-मेल-geeta13sudesh8@gmail.com


