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सर्वं शिवम्: शून्य भी, अनंत भी

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"सर्वं शिवम" उस परम चेतना की यात्रा है जो सृष्टि के कण-कण और क्षण-क्षण में प्रवाहित हो रही है। शिव केवल एक नाम या मूर्ति नहीं, बल्कि वह अनंत शून्य हैं जिससे ब्रह्मांड का जन्म हुआ और वह अनंत प्रकाश हैं जिसमें सब विलीन हो जाता है। इस पुस्तक के माध्यम से भगवान शिव के उस स्वरूप को उकेरने का प्रयास किया गया है जो 'सत्यम शिवम सुंदरम' की पूर्णता को दर्शाता है। शिव जहाँ वैराग्य की पराकाष्ठा हैं, वहीं वे सौंदर्य का वह रूप भी हैं जो मन को मोह लेता है। वे अनंत हैं—उनकी न कोई सीमा है, न कोई छोर। वे काल के भी महाकाल हैं। इस किताब में पाठक जानेंगे कि कैसे शिव का सौंदर्य केवल उनकी आकृति में नहीं, बल्कि उनके त्याग, उनके करुणापूर्ण हृदय और उनके 'नीलकंठ' होने के धैर्य में निहित है। यह पुस्तक आपको बताएगी कि शिव जितने कठिन हैं, उतने ही सरल भी; जितने दुर्गम हैं, उतने ही सुलभ भी। यह उन सभी साधकों और पाठकों के लिए है जो शिव के भीतर छिपे अनंत सौंदर्य और उस शाश्वत सत्य की खोज करना चाहते हैं जो जीवन का असली आधार है। यह पुस्तक केवल शिव की गाथा नहीं, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार करने का एक माध्यम है—क्योंकि जो सर्वं है, वही शिवम है।
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"सर्वं शिवम" उस परम चेतना की यात्रा है जो सृष्टि के कण-कण और क्षण-क्षण में प्रवाहित हो रही है। शिव केवल एक नाम या मूर्ति नहीं, बल्कि वह अनंत शून्य हैं जिससे ब्रह्मांड का जन्म हुआ और वह अनंत प्रकाश हैं जिसमें सब विलीन हो जाता है। इस पुस्तक के माध्यम से भगवान शिव के उस स्वरूप को उकेरने का प्रयास किया गया है जो 'सत्यम शिवम सुंदरम' की पूर्णता को दर्शाता है। शिव जहाँ वैराग्य की पराकाष्ठा हैं, वहीं वे सौंदर्य का वह रूप भी हैं जो मन को मोह लेता है। वे अनंत हैं—उनकी न कोई सीमा है, न कोई छोर। वे काल के भी महाकाल हैं। इस किताब में पाठक जानेंगे कि कैसे शिव का सौंदर्य केवल उनकी आकृति में नहीं, बल्कि उनके त्याग, उनके करुणापूर्ण हृदय और उनके 'नीलकंठ' होने के धैर्य में निहित है। यह पुस्तक आपको बताएगी कि शिव जितने कठिन हैं, उतने ही सरल भी; जितने दुर्गम हैं, उतने ही सुलभ भी। यह उन सभी साधकों और पाठकों के लिए है जो शिव के भीतर छिपे अनंत सौंदर्य और उस शाश्वत सत्य की खोज करना चाहते हैं जो जीवन का असली आधार है। यह पुस्तक केवल शिव की गाथा नहीं, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार करने का एक माध्यम है—क्योंकि जो सर्वं है, वही शिवम है।
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साथी

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साहित्यांजलि

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हिन्दी साहित्य मंच की स्थापना 9 मार्च 2024 को हुई थी, तब से हिंदी साहित्य मंच सदैव साहित्य क्षेत्र में नवाचार लाने के लिए तत्पर रहता है और इस श्रेष्ठ कार्य में हिंदी साहित्य मंच परिवार का प्रत्येक सदस्य पूर्ण सहयोग प्रदान करता है। मंच को नित शिखर पर पहुंचाने वाली कार्यकारिणी का मंच सदैव आभारी रहेगा। हिंदी साहित्य मंच द्वारा अब 15 साझा संकलन पुस्तकें, 4 ई पत्रिकाएं,1साहित्यांजलि पत्रिका प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी साहित्य मंच द्वारा मंच मॉं शारदे से आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता है। पाठकों से विनम्र निवेदन है कि अगर पत्रिका में वर्तनी सम्बंधित या विचारों से आपके धर्म जाति भाषा को ठेस पहुंचे तो कलमकार को क्षमा करिएगा।
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सिंधुसुता

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सुकून

349.00
यह किताब सुकून कीर्ति वर्मा ने संकलन की है, इसमें 28 लेखकों ने भाग लिया हैं, लेखकों ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपने विचारों को दर्शाया है.. सुकून से सिर्फ एक शब्द ही नहीं बल्कि एक भावना हैं हर व्यक्ति अपने जीवन में सुकून चाहता हैं और हर किसी के लिए सुकून शब्द का मतलब अलग हैं, उम्मीद हैं कि आपको ये किताब प्रेरित करेगी अपने सुकून को ढ़ढने में और साथ ही आपको ये पंसद आएगी !
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सुकून

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यह किताब सुकून कीर्ति वर्मा ने संकलन की है, इसमें 28 लेखकों ने भाग लिया हैं, लेखकों ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपने विचारों को दर्शाया है.. सुकून से सिर्फ एक शब्द ही नहीं बल्कि एक भावना हैं हर व्यक्ति अपने जीवन में सुकून चाहता हैं और हर किसी के लिए सुकून शब्द का मतलब अलग हैं, उम्मीद हैं कि आपको ये किताब प्रेरित करेगी अपने सुकून को ढ़ढने में और साथ ही आपको ये पंसद आएगी !
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